तेरी चाहत की खोज में निकला था
इस सैयम की कश्ती ने छोडा था साथ
लेकिन तेरे एहसास की बदौलत जुड़ा था
इस झरने समा तू बेह गई,
लेकिन चट्टान की तरह में खड़ा था
तेरी चाहत की खोज में मे निकला था
डरा सा, सेहमा सा, छिप-छिप कर में निकला था
सोचा था तू होगी यही, लेकिन तू ना मिली कही
ना तू दिखी न तेरी परछाई,
तेरी खुशबू ने भी साथ छोड़ा था
तेरी चाहत की खोज में मे निकला था
जन्मों-जन्म के कसमों को पल भर में तू भूल गई
क्या कमी थी मुज में जो ऐसे दिल मेरा तोड़ गई
आज भी आंखे भर आती है तेरी यादों से,
लेकिन गिन्न चढ़ती है तेरे उन्हीं जूठे वादों से
इस टूटे प्रेम के पुल को में फिर से जोड़ ने चला था
तेरी चाहत की खोज में मे निकला था
-शिववाणी