Saturday, April 17, 2021

तेरी चाहत की खोज में मे निकला था

 तेरी चाहत की खोज में निकला था

इस सैयम की कश्ती ने छोडा था साथ

लेकिन तेरे एहसास की बदौलत जुड़ा था

इस झरने समा तू बेह गई,

लेकिन चट्टान की तरह में खड़ा था

तेरी चाहत की खोज में मे निकला था


डरा सा, सेहमा सा, छिप-छिप कर में निकला था

सोचा था तू होगी यही, लेकिन तू ना मिली कही

ना तू दिखी न तेरी परछाई, 

तेरी खुशबू ने भी साथ छोड़ा था

तेरी चाहत की खोज में मे निकला था


जन्मों-जन्म के कसमों को पल भर में तू भूल गई

क्या कमी थी मुज में जो ऐसे दिल मेरा तोड़ गई

आज भी आंखे भर आती है तेरी यादों से,

लेकिन गिन्न चढ़ती है तेरे उन्हीं जूठे वादों से

इस टूटे प्रेम के पुल को में फिर से जोड़ ने चला था

तेरी चाहत की खोज में मे निकला था

                     -शिववाणी

8 comments:

Unknown said...

Great Bro! ❤️

Anonymous said...

Prefectly written!

Unknown said...

Jordar bhai ❤❤💯👍

Daksh said...

अति उमदा ❤️

Anonymous said...

👌🏻👌🏻

Anonymous said...

Your work is getting wiser day by day ✨��

Unknown said...

Proud of you baba ❤

Anonymous said...

Great 👌🏻👌🏻 Shivvvlllooo

तेरी चाहत की खोज में मे निकला था

 तेरी चाहत की खोज में निकला था इस सैयम की कश्ती ने छोडा था साथ लेकिन तेरे एहसास की बदौलत जुड़ा था इस झरने समा तू बेह गई, लेकिन चट्टान की तरह...